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Hanumat Acharaj Dekhani Lankava Nagar Me Vibhishan Ji Ke Ghar Me Na

Hanumat Acharaj Dekhani Lyrics: लंकवा नगर में  हनुमत अचरज देखनी लंकवा नगर में  विभीषण जी के घर में ना  देखलें तुलसी के गाँछ  मन में सोचे लगले बात  के बा हरि भजनिया करत एह नगर में  विभीषण जी के घर में ना  विभीषण जी के घर में ना लिरिक्स  हनुमत वानर रूपवा धइलें  उनका कुटिया में गइलें  उनसे परिचय पुछलें नरमी तेवर में  विभीषण जी के घर में ना  हमार विभीषण हऊवे नाम  भजन करीं सुबह शाम  गुंजन डूबलें अइसन भगती लहर में  विभीषण जी के घर में ना  समाप्त….